मोतिहारी में फर्जी अग्नि एप से 1 करोड़ 13 लाख की ठगी, मास्टरमाइंड संगम कुमार हरियाणा से गिरफ्तार
मोतिहारी साइबर थाना पुलिस ने फर्जी अग्नि एप के जरिए करीब 1 करोड़ 13 लाख रुपये की ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के मास्टरमाइंड संगम कुमार को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस टीम ने हरियाणा में छापेमारी कर उसे दबोचा। आरोप है कि गिरोह ने मोबाइल रिचार्ज, बिजली बिल भुगतान और विज्ञापन से जुड़ी आकर्षक योजनाओं का झांसा देकर युवाओं से भारी धनराशि निवेश कराई और बाद में एप बंद कर रकम निकाल ली।
हरियाणा के फरीदाबाद से गिरफ्तारी
साइबर पुलिस की टीम ने हरियाणा के फरीदाबाद जिले के पाली करेशर जोन थाना क्षेत्र अंतर्गत पाली गांव से संगम कुमार को गिरफ्तार किया। साइबर डीएसपी अभिनव परासर ने बताया कि संगम स्वयं को अग्नि एप का सीओ बताकर युवाओं को निवेश के लिए प्रेरित करता था। मामले में शामिल अन्य आरोपियों की पहचान कर ली गई है और उनकी गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं।
ऐप के जरिए दिया जाता था अधिक रिटर्न का लालच
जांच में सामने आया है कि गिरोह युवाओं को मोबाइल रिचार्ज, बिजली बिल भुगतान और ऑनलाइन विज्ञापन के नाम पर अधिक लाभ का प्रलोभन देता था। निवेश की राशि जितनी अधिक होगी, उतना अधिक फायदा मिलने का दावा किया जाता था। कुछ दिनों तक निवेशकों के खातों में कमीशन के तौर पर धनराशि भी भेजी गई ताकि भरोसा कायम रहे। जब एप में एक करोड़ रुपये से अधिक की राशि जमा हो गई तो एप को अचानक बंद कर दिया गया और गिरोह ने पूरी रकम निकाल ली।
2025 में दर्ज हुआ था मामला
यह मामला वर्ष 2025 का है। रक्सौल थाना क्षेत्र के छोटा परेउवा ब्लॉक रोड वार्ड संख्या 18 निवासी अभिषेक कुमार शर्मा ने साइबर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। प्राथमिकी में संगम कुमार के अलावा दिल्ली निवासी जितेंद्र कुमार शर्मा उर्फ विक्की, उत्तर प्रदेश निवासी संजीव कुमार, जितेंद्र शर्मा और संतोष कुमार को आरोपी बनाया गया था।
सेमिनार कर युवाओं को जोड़ा गया
पुलिस के अनुसार गिरोह ने रक्सौल क्षेत्र में सेमिनार आयोजित कर फर्जी एप का प्रचार किया था। इसमें अधिक पूंजी निवेश करने पर कार और अन्य आकर्षक उपहार देने का लालच दिया गया। युवाओं को भरोसा दिलाने के लिए शुरुआती दिनों में कमीशन के रूप में कुछ राशि लौटाई गई। इसके बाद बड़ी रकम जमा होते ही एप बंद कर दिया गया।
कई युवकों के लाखों रुपये डूबे
जांच के दौरान पता चला कि मनोहर नामक युवक ने एप में सर्वाधिक 47 लाख 87 हजार रुपये निवेश किए थे। अभिषेक कुमार ने 21 लाख 95 हजार, रुपेश ने 9 लाख 10 हजार, नारायण कुमार ने 7 लाख 50 हजार और असलम आलम ने 5 लाख 90 हजार रुपये लगाए थे। इसके अलावा अन्य युवकों ने भी बड़ी धनराशि निवेश की थी। रकम आना बंद होने के बाद सभी को ठगी का एहसास हुआ।
छापेमारी टीम में शामिल अधिकारी
संगम कुमार की गिरफ्तारी के लिए गठित टीम में साइबर डीएसपी अभिनव परासर के साथ इंस्पेक्टर मुमताज आलम, राजीव कुमार सिन्हा, दारोगा शिवम कुमार सिंह और सिपाही राकेश कुमार शामिल थे। पुलिस अन्य आरोपियों की तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है।
साइबर पुलिस की अपील
पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी एप या ऑनलाइन योजना में निवेश से पहले उसकी वैधता की जांच अवश्य करें। अधिक लाभ या कम समय में ज्यादा रिटर्न के दावे अक्सर धोखाधड़ी का माध्यम बनते हैं। साइबर ठगी की आशंका होने पर तत्काल हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें या साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।
मोतिहारी साइबर पुलिस का कहना है कि इस तरह के फर्जी एप और निवेश योजनाओं पर निगरानी रखी जा रही है। मामले की विस्तृत जांच जारी है और शेष आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद और तथ्य सामने आने की संभावना है।
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