भारत में जनगणना 2027 का पहला चरण शुरू, 33 सवालों के जरिए जुटाई जाएगी विस्तृत जानकारी
विवेक तिवारी की रिपोर्ट : नई दिल्ली। देश में जनगणना की प्रक्रिया एक बार फिर शुरू होने जा रही है। 1 अप्रैल से जनगणना 2027 का पहला चरण औपचारिक रूप से प्रारंभ हो गया है। इस चरण में मुख्य रूप से मकानों की स्थिति, सुविधाओं और परिवारों से जुड़ी बुनियादी जानकारी एकत्र की जाएगी। यह प्रक्रिया 30 सितंबर तक जारी रहेगी और इसके तहत देशभर में करोड़ों परिवारों का डेटा संकलित किया जाएगा।
भारत सरकार द्वारा जारी इस चरण को “हाउस लिस्टिंग एवं हाउसिंग सेंसस” कहा जाता है, जिसमें मकानों की संरचना, उपयोग और उसमें रहने वाले परिवारों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति का आकलन किया जाता है। इस बार की जनगणना कई मायनों में खास है, क्योंकि इसमें पहली बार नागरिकों को खुद अपनी जानकारी देने का विकल्प भी दिया गया है।
पहली बार लागू हुई स्व-गणना की सुविधा
भारत के रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने जानकारी दी कि इस बार जनगणना प्रक्रिया को डिजिटल और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए “सेल्फ एन्यूमरेशन” यानी स्व-गणना की सुविधा शुरू की गई है। इसके तहत नागरिक स्वयं आधिकारिक पोर्टल पर जाकर अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं।
उन्होंने बताया कि नागरिक अपने राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में गृह गणना शुरू होने से पहले 15 दिनों के भीतर यह प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। यह सुविधा 16 भाषाओं में उपलब्ध कराई गई है, जिससे विभिन्न भाषाई पृष्ठभूमि के लोग आसानी से भाग ले सकें।
स्व-गणना के लिए परिवार का मुखिया या कोई भी सदस्य पोर्टल पर मोबाइल नंबर और बुनियादी जानकारी के साथ पंजीकरण कर सकता है। इसके बाद वह अपने जिले का चयन कर, नक्शे पर अपने घर का स्थान चिन्हित कर और निर्धारित प्रश्नों के उत्तर देकर जानकारी जमा कर सकता है।
पूछे जाएंगे 33 महत्वपूर्ण प्रश्न
सरकार ने जनगणना के पहले चरण के लिए कुल 33 प्रश्न निर्धारित किए हैं, जिनके माध्यम से मकान और परिवार की स्थिति का विस्तृत आकलन किया जाएगा। इन प्रश्नों में भवन की पहचान, निर्माण सामग्री, उपयोग, परिवार की संरचना और उपलब्ध सुविधाओं से जुड़े पहलू शामिल हैं।
इन प्रश्नों में भवन नंबर, मकान नंबर, फर्श, दीवार और छत की सामग्री, मकान का उपयोग और उसकी स्थिति से लेकर परिवार के सदस्यों की संख्या, मुखिया का नाम और लिंग, जाति वर्ग, स्वामित्व की स्थिति, कमरों की संख्या और विवाहित दंपतियों की जानकारी शामिल है।
इसके अलावा पेयजल का स्रोत, प्रकाश की व्यवस्था, शौचालय की उपलब्धता और प्रकार, गंदे पानी की निकासी, स्नानगृह और रसोई की सुविधा जैसे बुनियादी जीवन स्तर से जुड़े सवाल भी पूछे जाएंगे।
डिजिटल और तकनीकी पहुंच को ध्यान में रखते हुए रेडियो, टीवी, इंटरनेट, कंप्यूटर, मोबाइल फोन और वाहनों से संबंधित जानकारी भी ली जाएगी। साथ ही परिवार द्वारा उपभोग किए जाने वाले मुख्य अनाज और संपर्क के लिए मोबाइल नंबर भी दर्ज किया जाएगा।
डिजिटल प्रक्रिया से बढ़ेगी पारदर्शिता
इस बार जनगणना को पूरी तरह से डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने का प्रयास किया गया है। स्व-गणना के बाद एक 16 अंकों की यूनिक आईडी जनरेट की जाएगी, जिसे फील्ड विजिट के दौरान गणनाकर्ता को दिखाना होगा। इससे डेटा की सत्यता और पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जनगणना के दौरान एकत्रित की गई व्यक्तिगत जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। इस डेटा का उपयोग न तो किसी अदालत में किया जाएगा और न ही किसी सरकारी लाभ या योजना के लिए सीधे तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा।
राज्यों में चरणबद्ध तरीके से शुरू होगी प्रक्रिया
सूत्रों के अनुसार, देश के 10 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने अप्रैल में जनगणना के पहले चरण को शुरू करने की अधिसूचना जारी कर दी है। इसके अलावा 15 राज्य मई में इस प्रक्रिया को शुरू करेंगे, जबकि शेष 10 राज्य जून या उसके बाद इस अभियान में शामिल होंगे।
इस चरणबद्ध तरीके से पूरे देश में एक व्यवस्थित और सुचारू जनगणना सुनिश्चित की जाएगी, ताकि किसी भी क्षेत्र में प्रशासनिक दबाव न पड़े और डेटा संग्रहण में त्रुटियां कम से कम हों।
जनगणना का महत्व और प्रभाव
जनगणना केवल जनसंख्या की गिनती तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह देश की सामाजिक, आर्थिक और बुनियादी संरचना को समझने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। इसके आधार पर सरकार विभिन्न योजनाओं, नीतियों और संसाधनों के वितरण की रणनीति तैयार करती है।
मकानों की स्थिति, बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता और तकनीकी पहुंच जैसी जानकारी से यह आकलन किया जा सकता है कि किस क्षेत्र में किस प्रकार के विकास कार्यों की आवश्यकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल जनगणना और स्व-गणना की व्यवस्था से डेटा की गुणवत्ता बेहतर होगी और नागरिकों की भागीदारी भी बढ़ेगी। इससे भविष्य की योजनाएं अधिक सटीक और प्रभावी बन सकेंगी।
नागरिकों से सहयोग की अपील
प्रशासन ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे जनगणना प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लें और सही जानकारी प्रदान करें। यह न केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया है, बल्कि देश के विकास में योगदान देने का अवसर भी है।
सरकार का मानना है कि यदि नागरिक ईमानदारी और जागरूकता के साथ इस प्रक्रिया में भाग लेते हैं, तो इससे देश की विकास योजनाओं को नई दिशा मिलेगी और संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव हो सकेगा।
जनगणना 2027 का यह पहला चरण देश के भविष्य की योजना बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले महीनों में इसके आंकड़े न केवल सरकार बल्कि शोधकर्ताओं और नीति निर्माताओं के लिए भी अहम साबित होंगे।
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